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दक्षिण ऊद्लाबाड़ी (असम)


अनामिका (काल्पनिक नाम) , आयु -17 वर्ष दक्षिण ऊद्लाबाड़ी शहर के बाहरी क्षेत्र में कैलाशपुर चायबागन की रिहायसी कालोनी में रहती थी, जब इस केस के सिलसिले में और लड़की के माता पिता से बात करने के लिए उनके घर गए तो पता चला कि वो लोग ये घर छोड़ कर कहीं और रहने लग गए हैं , घर की जगह केवल एक लकड़ियों का ढाँचा बचा था और आस-पड़ोस के लोगों ने बताया कि कुछ समय पहले तक यह घर बिलकुल ठीक था परंतु जब से अनामिका के साथ एक दुर्घटना घटी तब से वो लोग ये घर छोड़ कर चले गए हैं। पड़ोस की एक युवती का कहना था कि यहीं के तीन-चार स्थानीय लड़कों ने उसके साथ सामूहिक-दुष्कर्म किया, क्योंकि हम लोगों की सुरक्षा के लिए यहाँ कोई नहीं है अगर इस तरह के मामलों की शिकायत पुलिस से करें तो भी कोई फ़ायदा नहीं वहाँ किसी प्रकार की सुनवाई नहीं होती। इस स्थान पर हम और हमारे बच्चे खासतौर हमारी लड़कियाँ बिलकुल असुरक्षित हैं।इसी कारण अनामिका को पहले यहाँ से बहला-फुसला कर ले जाया गया और उसके बाद उसका बहुत दिनों तक कुछ पता नहीं चला लेकिन कुछ समय बाद पुलिस और एन जी ओ की मदद से लड़की को लाया गया और उस समय यह बात सबको पता चल गयी थी कि अनामिका यहाँ से ट्रैफ़िक हुई थी और बहुत दिनों तक दिल्ली रही और उसके बाद यहाँ आयी है और उसी घटना के बाद लड़कों ने यह दुष्कर्म उसके साथ किया। युवती का कहना था कि एक महिला जो पास के ही क़स्बे में रहती है अक्सर यहाँ तब आती है जब हम लोग काम पर जाते हैं, छोटे बच्चों को कुछ खाने-पीने का और बड़े (किशोर) बच्चों को काम का लालच देती है, शिकायत के बावजूद भी उस पर अब तक कोई रोकथाम नहीं लगी है। आज यही कारण है कि अनामिका के माता -पिता अब यहाँ नहीं रहते हैं। उसके बाद स्थानीय लोगों द्वारा उनका पता पूछा गया तब पता चला कि पूरा परिवार यहाँ से ५-६ किलोमीटर दूर खेतों के पास एक बस्ती में रहते हैं। आख़िरकार जब अनामिका के परिवार से मिले तो उन्होंने अपने घर पर मिलना ठीक नहीं समझा और हम लोगों से बस्ती के बाहर मुलाक़ात की और बताया कि पिछले दो तीन महीने से ही वो लोग यहाँ रह रहे हैं, पहले वो लोग कैलाशपुर-चायबागान बस्ती में रहते थे परंतु जो दुर्घटना उनकी बेटी के साथ हुई उसके बाद वहाँ रहने की हिम्मत नहीं थी क्योंकि उसी घर में उनकी बेटी के साथ सामूहिक-बलात्कार हुआ और उनकी बेटी को ट्रैफ़िक किया गया, घटना होली के एक दिन बाद की है। अनामिका के माता-पिता का कहना है कि हमारी बेटी फिर से ट्रैफ़िक हुयी है वह दिल्ली में किसी जगह घरेलू कामगार के रूप में काम कर रही है और उसके साथ एक और लड़की भी है लेकिन अभी उस नम्बर पर कोई बात नहीं हो रही है और अब तो पुलिस के पास भी जाने से डर लगता है क्योंकि हम लोग दो तीन बार पुलिस के पास गए परंतु अब नहीं जाते क्योंकि पुलिस ने कहा कि क्या कारण ये सब तुम्हीं लोगों के साथ बार-बार क्यूँ हो रहा है। पूछने पर पता चला कि वो अबतक स्थानीय पुलिस स्टेशन ही गए हैं क्योंकि उनके पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वो लोग ज़िला पुलिस स्टेशन में जाकर शिकायत दर्ज करवा सकें। यह केस बहुत ही संवेदनशील है और साथ ही इसमें जो मुख्य तथ्य उभर कर आते हैं , पहला लड़की का दोबारा ट्रैफ़िक होना- जो इस क्षेत्र को अपराध के संदर्भ में उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में दर्शाता है। दूसरा सामाजिक सुरक्षा का अभाव जिस कारण लड़की के साथ सामूहिक-दुष्कर्म जो स्थानीय लड़कों ने ही किया जिससे समाज की मानसिकता जिसमें पीड़िता के प्रति असंवेदनशीलता नज़र आती है और पूरी तरह से लड़की का वस्तुकरण(obejectification) करता है समाज की इसी असंवेदनशीलता के कारण उसके प्रति सामाजिक सुरक्षा कम हो जाती है और अपराधी आसानी से उस तक अपनी पहुँच बना लेता है। इन सबके अतिरिक्त ग़रीबी इस पूरी समस्या का सबसे बड़ा कारण है।इस बस्ती के लगभग सभी लोग मज़दूरी करते हैं आय का कोई निश्चित साधन ना होने के कारण जीवन की संघर्षपूर्ण स्थिति लगातार बनी रहती है।